कृष्ण का कर्ण को दिया गया अजीबोगरीब ऑफर —
महाभारत उद्योग पर्व के क्रिटिकल एडिशन के अध्याय 138 के श्लोक हैं।
विवेक देबरॉय ने अपने महाभारत के अनुवाद में इसका अर्थ करते हुए बताया है कि "छठी बार में अथवा छटवें समयपर द्रौपदी तुम्हारे साथ संभोग करेगी (At the sixth point of time, Droupadi will have intercourse with you)"। यानि कृष्ण कर्ण को कहते हैं कि अगर तुम हमारे पक्ष में आ जाओ तो द्रौपदी भी तुम्हारी हो जायेगी, तुम उसके साथ संभोग कर सकोगे, इसके फुटनोट में विवेक देबरॉय ने बताया है कि छठी बार का अर्थ है "पांचों पांडवो के बाद छटी बार तुम्हारे साथ"।
Kisari Mohan Ganguly (KMG) महाभारत के Section CXL पे अनुवाद कुछ ऐसा ही हैं। पर संभोग कि जगह इन्होंने पत्नी बोल दिया कि द्रौपदी तुम्हारे पास पत्नीरूप से आयेगी। मूल श्लोक में "उपगमिष्यति" शब्द आया है, उपगम्/उपमगम का अर्थ "समीप आना, प्राप्त करना और संभोगादि" होता ही है।अत: प्रकरण अनुसार यही अर्थ बनेगा कि "द्रौपदी तुम्हारे साथ संभोग करेगी"।
अब 3 विद्वानों का अर्थ को एक साथ जोड़ा जाए तो कुछ ऐसा होगा कि। द्रौपदी कर्ण की पत्नी बनेगी (Kmg) + 2 महीना उसके साथ रहेगी प्रत्येक साल (DS) + उससे संभोग भी करेगी (Bibek Debroy)
यहाँ तक कि महामीमांसक कुमारिल भट्ट ने भी भी अपने तन्त्रवार्तिक - 1/3/4 में इसका ऐसा ही अर्थ स्वीकार किया है और ये बोल के इसको स्वीकार किया है कि चूंकि द्रौपदी एक दिव्य स्त्री थी इसलिए कितने ही उसके स्वामी उसके साथ भोग या विवाह भी कर लें तो तब भी उसकी पवित्रता बनी रहेगी।
कुछ लोग इस चीज को मिटाने का कोशिश करते ये बोलके कि ये कृष्ण नीति हैं, कृष्ण का ये वचन पूर्ण सत्य नहीं था ये एक उनका छल था जिससे कर्ण जो हैं कौरव के पक्ष में आ जाते।
अब भी कुछ लोग बोल सकते हैं कि ये तो कृष्ण वचन नहीं । तो हमको देखने चाहिए कि कृष्ण कही बोले कि कभी वो झूठ नहीं बोलते। क्या ऐसा कुछ मिलता हैं कि कृष्ण स्वयं बोल रहे हो मैने कभी झूठ नहीं बोला ??? बिल्कुल मिलता हैं।
मेरा जवाब :~ इस बात को हम माने तो कृष्ण का ये बात झूठा हो जाए। क्या आप लोग कृष्ण को झूठा साबित करना चाहते हो ? जबकि उद्योग पर्व 138/4-5 (CE) पे संजय ने बोला कृष्ण जो ये सब बचन कहे कर्ण को वो सत्य था।
[ महाभारत / अश्वमेधीक पर्व / अध्याय 69 / श्लोक 17-19 (गीता प्रेस गोरखपुर) ]
इन सब चीजों से हमको ये पता चलता हैं, पुराने वैदिक धर्म में अपने स्त्री तक को दे दिया जाता था उस समय ये बहुत सामान्य बात था। यही बात हमको नारद स्मृति पे भी देखने को मिलता हैं। जिधर स्त्री को बेचा जाता था। और बहुत से राजा लोग दान में भी दे देते थे।












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